ज़िन्दगी किश्तोंमे बिताती है
कोई किश्त बचपन की तो कोई जवानी की
हर किश्त की अपनी कहानी होती है
हर किश्त की अपनी आह होती है
कभी दोहराना चाहुँ तो सिर्फ यादोंके चिकटठे मिलते है
किश्ते वापस नहीं मिलती
वो साहूकार जो ऊपर बैठा है , किश्ते लिए जाता है
उसका असल कभी चूका नहीं पाते हम
और इन्ही किश्तोंके के साथ दुनियासे उठ भी जाते है
अपनी कुछ यादें छोड़कर , असल लेकर
ज़िन्दगी की आखरी किश्त पूरी करते
ज़िन्दगी किश्तों में बंटी है
कोई किश्त बचपन की तो कोई जवानी की
हर किश्त की अपनी कहानी होती है
हर किश्त की अपनी आह होती है
कभी दोहराना चाहुँ तो सिर्फ यादोंके चिकटठे मिलते है
किश्ते वापस नहीं मिलती
वो साहूकार जो ऊपर बैठा है , किश्ते लिए जाता है
उसका असल कभी चूका नहीं पाते हम
और इन्ही किश्तोंके के साथ दुनियासे उठ भी जाते है
अपनी कुछ यादें छोड़कर , असल लेकर
ज़िन्दगी की आखरी किश्त पूरी करते
ज़िन्दगी किश्तों में बंटी है