रात की चद्दर ओढ़े सोये हुए उसे शायर ने पूछा
कहाँ है वो ?
जो मेरे दिल में रहती है,
जो मेरे ख्वाबोंमे आती है,
जो मेरी सासोंको मेहकाती है,
दीवाना बनाती है।
चद्दर से झाँकते उस चाँद ने हंसकर जवाब दिया
शायर , में भी उसे सदियोंसे ढूँढ रहा हूँ,
तुम्हारे ख़्वाबोंमें।
कहाँ है वो ?
जो मेरे दिल में रहती है,
जो मेरे ख्वाबोंमे आती है,
जो मेरी सासोंको मेहकाती है,
दीवाना बनाती है।
चद्दर से झाँकते उस चाँद ने हंसकर जवाब दिया
शायर , में भी उसे सदियोंसे ढूँढ रहा हूँ,
तुम्हारे ख़्वाबोंमें।
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