आज मुडके खुद को देखा
सिर्फ़ पिंजर दिखायी दिया
वो बोज़ल सी आँखे , थका हुआ दिल
केह रहा था , दूर जा
यहाँ पे अब कुछ नहीं रहा
सुखी मिटटी का ढेर है ये
बस एक हवा का झोंका आने की देर है
कल वो भी न दिखेगा तुझे
सिर्फ़ पिंजर दिखायी दिया
वो बोज़ल सी आँखे , थका हुआ दिल
केह रहा था , दूर जा
यहाँ पे अब कुछ नहीं रहा
सुखी मिटटी का ढेर है ये
बस एक हवा का झोंका आने की देर है
कल वो भी न दिखेगा तुझे
चला जा, जहाँ ज़िंदगी तुम्हारा इंतज़ार कर रही है
वो पर्बत, पेड़ , वो झरने , वो दरीयां
सब तुम्हारे हैं, बस्स तुम्हारे
सहिच... :)
ReplyDeleteसहिच... :)
ReplyDeleteNice
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