असच
थोडसं मनातल..थोडसं मनाला जाणवलेल...
Friday, 2 January 2015
पन्नें
बिखरे पन्नोंसी ज़िंदगी है
कुछ़ मेरे पन्नें तुम्हारे पास है
ज़िंदगी अधुरी है,
उन पन्नोंबीना
अधुरे पन्नोंसे पुरी किताब नहीं बनती
अधुरी ज़िंदगी की कोई किताब नहीं बनती।
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