असच
थोडसं मनातल..थोडसं मनाला जाणवलेल...
Saturday, 3 January 2015
सितारें
ये सितारें भीं देखो, कितने बत्तमीज है
जब अवस आती है, तो चाँद को अपनी गिरह़ में छुपा लेते है
फिर धीरे धीरे उसे बाहर निकालते है
जताना चाहते है, चाँद उनका है, हमारा नहीं
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