Tuesday, 6 January 2015

चाँद-२

आज चाँद जमीं के इतने करीब था , के मानो हाथोंमें समां जाये
भिखारी बच्ची ने पकडनेकी कोशिश भी की
पगली कहीं की
कभी चाँद भी भिखरियोंके हाथ लगता हैं ?
नहीं समज़ती
वो आसमां में ही रहता हैं
वो तुम्हे दिखता है काफ़ी है
नहीं तो कलसे उसे देखने के भी पैसे पड़ेंगे 

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