Tuesday, 13 January 2015

रात

रात धीमें पाँव आयी थी
बड़ी उदास लग रही थी
सूरज के साथ जाती शाम को देख के ,  ठंडी साँसे भी भरी थी
बड़ी बेचैन थी
आज तो चाँद भी छुपाया था उसने

इसी उदासी में शायर पास आयी
शायर ने बड़े प्यार से कहा ,
'बहोत इंतजार करवाती है तू
पुरा दिन ढलने तक नहीं आती
तुझे देखुँ तो शेर सुझे , नहीं तो मानो जिंदगी थम जाती है '

रात मन ही मन खिल गयी
उसने बादलोंमें छुपाया चाँद शायर को दिखाया और कहा
'आजसे ये तुम्हारा , मेरी ज़िंदगी का ये लम्हा, हसीन कर दिया तुमने '

रात ने जाते जाते गम भरे उस दिल को सेहलाया
शायर को मेहसुस हुआ
एक ठंडी हवा का जोंका उसके दिल को छुता निकल गया



1 comment: