रात ने जाते जाते कोहरे की चद्दर ओढ़ा दी
बहोत शांति से सो रही थी वो वादी
कहीं कोई आवाज़ नहीं
मानो बहोत दिनों बाद ऐसी नींद मिली थी उसे
आज तो सूरज भी देर से उगा
कोहरे की चादर हटा के, उसने वादी का सिर चुम लिया
वादी शरमा गयी
उसने कोहरे की चद्दर में सिर छुपाना चाहा
पर सूरज प्यार से परे नहीं कर पायी
धीरे धीरे आँखे खोलके उसने सूरज की तरफ देखा
प्यार भरी हवा वादी में घूमने लगी
👌👌👌
ReplyDeletethank you :)
DeleteAwesome..!!
ReplyDeleteThank you ! :)
DeleteMastch
ReplyDeleteThanks! :)
DeleteKay bats hai बहोत खूब
ReplyDeletethank you so much :)
Delete